धीरे धीरे से भाग --- 10
वीर ने अपनी बाइक एक कैफे के आगे रोकी और उसका हाथ पकड़ कर अंदर की और ले जाने लगा वो भी बिना कुछ बोले उसके पीछे पीछे चलने लगी,,,,,
शायद दीप्ती जानती थी वो ऐसा क्यों कर रहा है आखिर उसे भी तो अपने सवालों के जवाब चाहिए ही होंगे ना की आखिर वो ये सब क्यों कर रही थी उस के साथ दीप्ती का रवाइए अचानक से क्यों बदल गया उस के लिए पर दीप्ती भी आज पूरी तरह तैयार थी उस के सभी सवालों के लिए,,,,,
दोनों एक टेबल पर जा कर बैठ गयें उसने दीप्ती से पूछ क्या लोगी तुम,,,,
दीप्ती ने कहा कुछ नही,,,
वो बोला,, अच्छा ये बताओ कैसी हो तुम ज़ब तक तुम्हे नहीं देखता दिल को एक पल भी सुकून नहीं मिलता है मुझे तुम्हे देखने के लिए ही तो मै यहाँ किसी ना किसी बहाने से आ ही जाता हूँ,,,,
दीप्ती को उसकी बाते अब बिलकुल भी पसंद नहीं आ रही थी वो बोली अरे जो बात करनी है वो करो और जाने दो मुझे नहीं बैठना मुझे यहाँ तुम्हारे साथ,,
अगर कही मुझे किसी ने देख लिया तो क्या सोचेंगे मेरे बारे मे ये सोच सोच कर मुझे डर भी लग रहा था,,,,
यही सोच कर दीप्ती वीर से बोली देखो इधर उधर की बाते ना करके तुम सीधे मुद्दे पर आओ,,,,,
वीर ने एक लम्बी सांस ली और बोला ठीक है तो अब बताओ की अखिर तुम्हे हुआ क्या है दो दिन से देख रहा हूँ मुझ से ऐसी क्या गलती है जिस की सजा तुम मुझे दे रही हो,,
दीप्ती बोली गलती तो मुझ से हुई है तुम से नहीं,,,,
वीर बोला क्या मतलब है तुम्हारा साफ साफ बोलो मुझे ऐसे सदमे ना दो जो बात है सीधा सीधा बता दो……
दीप्ती ने तापक से कहा तुम से शादी नहीं कर सकती,,,
वीर बोला अच्छा,, तो ठीक है मत करो मैंने कभी तुम से जबरदस्ती तो नहीं की ना पहले ही बोला था अगर कोई है तो बता दो पर ज़ब तुम ने ही????? ये बोलता हुआ वो चुप हो गया,,,,
दीप्ति ने कहा,,,, हाँ,,,, ये ही गलती हो गयी मुझ से जो उस समय नहीं बोल पाई पर अब बड़ी हिम्मत की है ज़ब जाकर तुम्हे बोल रही हूँ,,,,,
वीर बोलो,,, ओह तो ये बात पहले ही बोल देती,,,,
दीप्ती बोली तो अब बोल रही हूँ न,,,,
उस से बात करते हुए उसकी आँखे और जुबान उसका साथ नहीं दे रही थी वो अपने चेहरे से आते जाते भावो को नहीं छुपा पा रही थी कोई होता तो भाव आते ना वैसे ज़ब कोई है ही नहीं तो कहा से वो फिलिंग अपने चेहरे पर लती नाटक कर लेती है ,,, थोड़ा बहुत पर इतना नहीं की अपने शब्दों के अनुरूप अपने भावो को भी वैसे ही दिखा पाए,,,,,
दीप्ती ने वीर को बताना शुरू किया,,,, एक लड़का है हम दोनों स्कुल से साथ मे पढ़ते है ज़ब छोटे थे ज़ब से एक दूसरे को चाहते थे पर अभी तक कहा नहीं था अपनी एहसासो को दोनों ने अंदर ही रखा थे उसने भी कभी हिम्मत नहीं की कभी भी वो ही मुझे अपने दिल की बात बता दे,,,,,
वीर बड़े ही ध्यान से दीप्ती की बाते सुन रहा था!
उसकी आँखे उसकी आँखो मे वो देखना चाह रही थी जो दीप्ती उससे नहीं बोल पा रही थी,,,,
ज़ब वो दीप्ती को देखता
तो दीप्ती खुद को नर्वस महसूस करती पर उसे तो आज ज़ब ख़त्म करना था तो बोले जा रही थी जो मुँह मे आ रहा था और वो एक टक उसकी बाते सुने जा रहा था,,,,,
वीर ने कहा,,,, अच्छा ये बताओ की अब कैसे बोला तुम दोनों को कैसे पता चला अपनी फिलिंग के बारे मे,,,,,
एक नज़र उस को देखा फिर दीप्ती ने बोलना शुरू किया अभी कुछ दिन पहले वो कॉलेज जा रहा था तो उस कर एक्सीडेंट हो गया मुझे ये बात उस के एक दोस्त ने बताई तो मै ये सुनते ही हॉस्पिटल भागी उसकी हालत ठीक नहीं थी वो अब भी बेहोश था,,
मै उस के रूम मे पहुंची तो उसके सर मे हाथ मे पैर मे पट्टीया बँधी हुई थी उसे इस हाल मे देख कर मै खुद को रोक ही नहीं पाई और उस के पास जा कर उसका हाथ पकड़ कर बहुत रोई,,,,,
उससे दूर होने कर एहसास ने ही मुझे तोड़ दिया था और पता नहीं मै क्या क्या उसे बोल गयी उस कर एहसास मुझे ज़ब हुआ ज़ब मैंने उसकी आवाज़ सुनी उस ने बोला अगर इतना ही प्यार करती थी तो कभी कहा क्यों नहीं मुझ से क्या तुमने कभी मेरी आँखो मे अपने लिए प्यार नहीं दिखा,,,,
ना जाने कब से ये दिल बस तुम्हारे लिए ही धड़कता है पर तुम ने तो अपने चारो तरफ एक जाल बिछा रखा है जिस को लाँगना किसी के भी बस की बात नहीं थी इस लिए कभी तुम से बोल ही नहीं पाया की मेरे दिल मे तुम्हारे लिए कितना प्यार है वो तो भला हो उस गाड़ी वाले कर जिसने मुझे लपेट लिया ना मेरा एक्सीडेंट होता ना ही मुझे तुम्हारे दिल की बात पता चलती,,,,,,
ये सब मे मै ये भूल ही गयी थी की वहाँ हमारे आलावा भी और भी लोग है जो हम दोनों की बात सुन रहे है,,,,,,
उसके सभी दोस्त भी बहुत खुश हुए वो हम दोनों के इज़हार से,,,,,
बस ये बात है ज़ब मै उससे प्यार करती हूँ तो तुम से शादी नहीं कर सकती,,,,,
ये बोल कर मे वहाँ से उठी और बाहर निकल गयी वो वही बैठा रहा,,,,,,,,
जारी है
RISHITA
02-Sep-2023 10:00 AM
Amazing
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madhura
01-Sep-2023 10:56 AM
V nice
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Anjali korde
29-Aug-2023 11:42 AM
Nice
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